श्री राम



चक्षु रख चरण पे तेरे, मिथ्या तू त्याग दे;

रख यकीन उसपे, वो साक्षात् श्री राम है

जिसके लिए पार किया, सागर श्री राम ने;
छोड़ चले उस प्रेम को, प्रजा प्रेम वास्ते

त्याग दिया राज जिसने, छोड़ा माँ की ममता को;
कर के देखना ऐसा तुम, जो थोड़ी बहुत क्षमता हो

मर्यादा की मूरत है, संघर्ष की है सूरत;
कर्तव्य जिसका प्राण, वो रघुवीर हे मनोहर

सुन ले भेरु, चल के देख मेरे राम की शिक्षा पे;
भवसागर तू तर जाए, ऐसी कठिन ये परीक्षा है

पथ पर इनके चलके देखो, दुःख पीड़ा भूल जाओगे;
पुरे जगत के सामने, खुद को राम सा पाओगे

लोग पुछे तो बतला देना, राम-राज्य लाएँगे;
देशभूमि में सोये हुए, सभी राम जगायेंगे

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