मेरे चाँद





मेरे घर की छत पे है, दो चाँद;
एक है अंतरिक्ष का अभिमान, दूसरा है मेरा ख्वाब!

खोजा है एक चाँद को दूसरे चाँद में, कई बार मेने;
देख दोनों को साथ साथ, खोई है मेरी नींद, कई बार मेने!

पहले की चांदनी के दीवाने है हजार, लेकिन 
दूसरे की हंसी आगे, पहले की चांदनी है बेकार!

रातभर करता रहा दूसरे की तारीफ पहले से,
अंतरिक्ष का चाँद इतना जला कि सुबह तक सूरज हो गया!

दोनों को है खुद से प्यार बेशुमार,
तभी तो इनको लिखते है, अक्श और गुलज़ार!

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