हर एक नई सुबह का आगाज़ हो तुम, हाँ
एक शायर का ख्वाब हो तुम;
बंजर मिट्टी पे पड़ी बरसात हो तुम, हाँ
एक शायर का ख्वाब हो तुम;
उस बंजर मिट्टी पे खीला हसीन गुलाब हो तुम, हाँ
एक शायर का ख्वाब हो तुम;
कभी भुला ना पाया, वो हकीकत हो तुम, हाँ
एक शायर का ख्वाब हो तुम;
वो किसी ख्वाब में बसा है ख्वाब की तरह,
एक जज्बात सा है, पुरानी शराब की तरह;
वो किसी ख्वाब सा मुकम्मल हो रहा है, हाँ
वो मेरे ख्वाब में बस रहा है;
Superb & excellent use of wording
ReplyDeleteThank You!
DeleteSuper jordar 👌👌
ReplyDeleteThank You!
Delete❣️
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