एक शायर का ख्वाब हो तुम




हर एक नई सुबह का आगाज़ हो तुमहाँ
एक शायर का ख्वाब हो तुम;

बंजर मिट्टी पे पड़ी बरसात हो तुमहाँ
एक शायर का ख्वाब हो तुम;

उस बंजर मिट्टी पे खीला हसीन गुलाब हो तुमहाँ
एक शायर का ख्वाब हो तुम;

कभी भुला ना पायावो हकीकत हो तुमहाँ
एक शायर का ख्वाब हो तुम;

वो किसी ख्वाब में बसा है ख्वाब की तरह,
एक जज्बात सा हैपुरानी शराब की तरह;

वो किसी ख्वाब सा मुकम्मल हो रहा हैहाँ 
वो मेरे ख्वाब में बस रहा है;

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