Friday, 22 March 2019

हिंदी कविता



खुद की तलाश में


हर रात चलता, हर रात फिरता

खुद के साथ में, खुद की तलाश में



मुसाफिर तू बन जा


आवाज है मेरी, साहसी तू बन जा

निकले सवेरा, मुसाफिर तू बन जा



श्री राम


लोग पुछे तो बतला देना, राम-राज्य लाएँगे;

देशभूमि में सोये हुए, सभी राम जगायेंगे




निरंतर कर्म ही महान है


योद्धा के प्राण में, उनके सभी राग में

धर्म के बहाव में, सोच की तलवार में



ज़िंदगी


ग़ालिब की कविता सी हो रही हैं ज़िंदगी,

देखने में अच्छी लगती हैं, समजने में नहीं;




हर कोई बन रहा रावण है


संयम, सादगी, सबर पे आयी आफत है,

देखो, हर कोई बन रहा रावण है;



मेरे चाँद


मेरे घर की छत पे है, दो चाँद;

एक है अंतरिक्ष का अभिमान, दूसरा है मेरा ख्वाब!



एक शायर का ख्वाब हो तुम


वो किसी के ख्वाब में बसा है ख्वाब की तरह,

एक जज्बात सा हैपुरानी शराब की तरह;



ख़याल


कागज़ और कलम बेशक मेरे है, लेकिन 

उस कागज़ पर ख़याल, सिर्फ तुम्हारा हैं!



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